बांकीमोंगरा में गूंजा ‘जय सतनाम’ का जयकारा, हर्षोल्लास के साथ मनाई गई बाबा गुरु घासीदास जयंती।
बांकीमोंगरा में गूंजा ‘जय सतनाम’ का जयकारा, हर्षोल्लास के साथ मनाई गई बाबा गुरु घासीदास जयंती।

कोरबा ( बांकीमोंगरा ) सत्य, अहिंसा और प्रेम का संदेश देने वाले महान समाज सुधारक संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती बांकीमोंगरा नगर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों में जैसे की गजरा साईड , सनसाईन स्कूल के समीप, मोंगरा बस्ती आदि क्षेत्रों में विशेष पूजा-अर्चना व ध्वजारोहण किया गया इसके अलावा गजरा साईड से सनसाईन स्कूल तक डिजे साउंड के साथ शोभायात्रा भी निकाली गई।
श्वेत ध्वज के साथ किया गया पालो रोपण।
सुबह से ही नगर के गजरा साईड, सनसाईन स्कूल के समीप, मोगरा बस्ती और अन्य वार्डों में स्थित जैतखंभों की साफ-सफाई कर उन्हें सजाया गया था। समाज के बुजुर्गों और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में ‘श्वेत ध्वज’ (पालो) का रोपण किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा के बताए मार्ग ‘मनखे-मनखे एक समान’ के सिद्धांतों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

पंचामृत से अभिषेक और आरती
आयोजन स्थलों पर गुरु बाबा की प्रतिमा और जैतखंभ का पंचामृत से अभिषेक किया गया। सफेद वस्त्र धारण किए श्रद्धालुओं ने ‘बाबा गुरु घासीदास की जय’ और ‘ जय सतनाम” जय सतनाम’ के जयघोष से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
वहीं बांकीमोंगरा के कई स्थानों पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ सभी वर्ग के लोगों ने मिल-जुलकर प्रसाद ग्रहण किया।

अतिथियों का संदेश
कार्यक्रम में पहुंचे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बाबा गुरु घासीदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया।
“मनखे-मनखे एक समान” का संदेश ही मानवता का सच्चा आधार है। बांकीमोंगरा के नागरिकों ने इस पर्व को आपसी सद्भाव की मिसाल के रूप में मनाया।
