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दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान: कोरबा के समाजसेवी महावीर यादव को ‘मानद डॉक्टरेट उपाधि ’ से सम्मानित।

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दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान: कोरबा के समाजसेवी महावीर यादव को ‘मानद डॉक्टरेट उपाधि ’ से सम्मानित

नई दिल्ली/कोरबा भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य और गौरवशाली राष्ट्रीय समारोह में छत्तीसगढ़ प्रदेश के कोरबा ज़िले के ग्राम देवरी के सुपुत्र, सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिवहन चालक संगठनों के सक्रिय प्रतिनिधि श्री महावीर यादव को समाज सेवा क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) उपाधि से नवाज़ा गया।
यह गौरवपूर्ण सम्मान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) – भारत सरकार से पंजीकृत प्रतिष्ठित संस्था ‘यूनिवर्सल हॉनरेरी अवार्ड काउंसिल’ द्वारा नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित सम्मान–समारोह के दौरान प्रदान किया गया।

इस समारोह के मुख्य अतिथि रूप में विक्रम वाधवा बॉलीवुड एक्टर, बजरंगी भाई जान मूवी के अभिनेता मनोज बख्सि, बॉलीवुड अभिनेत्री चुनौटी बंसल, एवं विभिन्न राज्यों के समाजसेवी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षा क्षेत्र के विद्वान और अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। संस्था ने यह स्पष्ट किया कि यह उपाधि केवल किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसी सामाजिक सोच के लिए है, जो समाज के सबसे आम वर्ग—वाहन चालक, श्रमिक, असंगठित मजदूर और आम नागरिकों—को सम्मान की धुरी पर लाना चाहती है।

संस्था के मुख्य प्रतिनिधियों ने घोषणा की

“ महावीर यादव ने बिलासपुर संभाग परिवहन चालक संघ के माध्यम से चालक वर्ग के सम्मान, अधिकार, सुविधा, दुर्घटना–सहायता, सामाजिक सुरक्षा और न्याय के लिए जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय संघर्ष किया है। वे समाज सेवा के सक्रिय, निर्भीक और परिणाम–मुखी प्रतिनिधि हैं।”

सम्मान के क्षण में भावुक अभिव्यक्ति

सम्मान ग्रहण करते समय महावीर यादव ने राष्ट्रीय मंच से कहा—

“यह सम्मान मेरे व्यक्तिगत जीवन की उपलब्धि नहीं, यह उस सोच का सम्मान है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग पहुँचाने का विश्वास रखती है। देवरी गांव का एक सामान्य परिवार आज दिल्ली के राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित हो रहा है—यह मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा गर्व है।”

उन्होंने आगे कहा कि उनकी पहचान किसी मंच से नहीं, अपनी मिट्टी, अपनी माँ–भूमि और अपने लोगों की धड़कनों से आती है।

“मैं जहाँ खड़ा हूँ, वहाँ छत्तीसगढ़ की महक, देवरी की धूल और मेरे लोगों का विश्वास मेरे साथ खड़ा है। यह सम्मान वास्तव में छत्तीसगढ़ की सामाजिक संस्कृति का राष्ट्रीय स्वीकार है।”

परिवार—संस्कार और ऊर्जा का स्रोत
महावीर यादव ने कार्यक्रम में अपने पिताजी श्री दरसराम यादव एवं माताजी श्रीमती गीता बाई यादव को अपनी जीवन–प्रेरणा बताया।
उन्होंने कहा कि माता–पिता के संस्कारों ने उन्हें सेवा, धैर्य, संघर्ष और सहयोग की शिक्षा दी।

भाई मिथलेश कुमार यादव, पत्नी धनकुंवर यादव, तथा बेटी तनीषा कुमारी यादव के समर्थन को उन्होंने अपनी चरम शक्ति बताया—

“यदि घर की दृढ़ता न हो, तो कोई भी व्यक्ति समाज में एक कदम भी स्थिर नहीं रख सकता।”

परिवहन चालक समुदाय—संघर्ष, सम्मान और सुरक्षा

बिलासपुर संभाग के परिवहन चालक संघ के साथ कार्य करते हुए महावीर यादव ने—

चालक वर्ग के सुरक्षा अधिकार

दुर्घटना–सहायता व कानूनी सहयोग

गंभीर बीमारी/आपदा में आर्थिक सहायता

सामाजिक सम्मान

सम्मानजनक संवाद

और प्रशासनिक स्तर पर समस्याओं की प्रस्तुति

जैसे मुद्दों को व्यवस्थित रूप से आगे रखा है।

उनका स्पष्ट मानना है कि—

“भारत की सड़कें जिस वर्ग के हाथों सुरक्षित चलती हैं, वह वर्ग सम्मान का प्रथम अधिकारी है।”

छत्तीसगढ़—समाज सेवा का नैतिक आधार

महावीर यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति मनुष्य को श्रम, संयम और सेवा सिखाती है। देवरी गांव के सामान्य परिवार, श्रमिक, खेतिहर, मजदूर और चालक—उनकी असली प्रेरणा हैं।

उन्होंने कहा—

“मैं आज भी सेवा के लिए तत्पर हूँ, और आगे मेरा प्रयास और कठोर, और विस्तृत होगा। मैं सिर्फ पुरस्कार का पात्र नहीं बनना चाहता—मैं अपने प्रदेश के लिए ज़िम्मेदारी का वाहक बनना चाहता हूँ।”

भविष्य की दिशा—स्पष्ट संकल्प

उन्होंने यह भी घोषित किया कि आगामी समय में वे—

ग्रामीण विकास कार्यक्रम

मजदूर–कल्याण योजनाएँ

युवा मार्गदर्शन एवं नेतृत्व विस्तार

परिवहन चालक सुरक्षा सेल का सुदृढ़ीकरण

आपदा–सहायता नेटवर्क

मानव सेवा अभियान

जैसे क्षेत्रों में गति और विस्तार देंगे।

■ अंतिम संदेश—राष्ट्र और प्रदेश को समर्पण

समारोह के अंत में उनका संदेश स्पष्ट और प्रभावी रहा—

“मेरी निष्ठा भारत के लिए है, मेरी आत्मा छत्तीसगढ़ में है, और मेरी पहचान देवरी के लोगों के बीच है। मैं जीवन भर समाज, श्रम और मानवता के लिए सक्रिय रहूँगा। जय हिंद! जय छत्तीसगढ़!”

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