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बरपाली बार महोत्सव में दिखी लोक संस्कृति की झलक।

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समार सिंह बिंझवार कि रिपोर्ट बरपाली बार महोत्सव में दिखी लोक संस्कृति की झलक।

छत्तीसगढ़/कोरबा कटघोरा के ग्राम बरपाली में आयोजित बार महोत्सव में लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली। कटघोरा ब्लाक से महज 10 किलोमीटर दूर पर स्थित ग्राम बरपाली बस्ती की पहचान हैं, जंगल क्षेत्र के नाम से पूरे देश-प्रदेश में प्रसिद्ध हैं।
यहां निवास करने वाले आदिवासी समाज पुराने समय से हर पांच वर्ष में बार महोत्सव मनाते आ रहे हैं। बार महोत्सव का शुभारंभ आदिवासी समाज के साथ ग्रामीणों ने बूढ़ादेव की पूजा कर शुभारंभ किया गया हैं, बार रानी, बार राजा, ठाकुर देव, झूला गोसाइन, मरखी माता, सकरिया थान, भीमसेन, बढ़ावन देव, समलाई इत्यादि बारह देवी-देवताओं की पूजा का विधान है। साथ ही निरंतर बाहर दिन6जनवरी से 17 जनवरी तक नाच गान का आयोजन किया जाना हैं।
लोगों ने परंपराकर ढोल मंजीरे, मादर के साथ नृत्य से समां बांधा। साल्हो, ददरिया गाकर युवक युवतियों के साथ ग्रामीण एक दूसरे को आत्मीय बनाने प्रेरित करते रहे। यह पर्व गांव की आपसी भाईचारे, शांति व प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

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