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बांकीमोंगरा में भाजपा के स्थापना दिवस पर ‘अपनों’ ने ही बनाई दूरी, जिलाध्यक्ष की गैरमौजूदगी से गुटबाजी की चर्चा तेज।

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हिमांशु चौधरी कि रिपोर्ट:बांकीमोंगरा में भाजपा के स्थापना दिवस पर ‘अपनों’ ने ही बनाई दूरी, जिलाध्यक्ष की गैरमौजूदगी से गुटबाजी की चर्चा तेज।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आज देश भर में अपना स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। लेकिन कोरबा जिले के बांकीमोंगरा मंडल में इस उत्सव के साथ-साथ पार्टी के भीतर पनप रही गुटबाजी और खींचतान भी खुलकर सामने आ गई। एक तरफ जहां कार्यकर्ता जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आज 6 अप्रैल को भाजपा मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा के नेतृत्व में बांकीमोंगरा में स्थापना दिवस का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठों का सम्मान किया गया और पार्टी की मजबूती पर जोर दिया गया।
हैरानी की बात यह रही कि भाजपा कोरबा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी उसी समय बांकीमोंगरा क्षेत्र के दौरे पर थे। लेकिन वे पार्टी के आधिकारिक स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के बजाय एक निजी एक भाजपा कार्यकर्ता के भूमिपूजन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। जिलाध्यक्ष कार्यक्रम में गए जो भाजपा के पदाधिकारी थे जिससे कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा का विषय बन गया कि संगठन के उत्सव से ज्यादा महत्व निजी आयोजनों को क्यों दिया गया। ताकि भाजपा का कार्यक्रम फेल हो सके और संगठन टूट सके

कार्यकर्ताओं में मायूसी, उठ रहे हैं ये सवाल -पार्टी के भीतर इस घटनाक्रम को लेकर सुगबुगाहट तेज है।

कार्यकर्ताओं के मन में कई तरह का सवाल उठ रहे हैं
क्या मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा द्वारा जिलाध्यक्ष को कार्यक्रम का आमंत्रण नहीं दिया गया था,
यदि निमंत्रण था, तो क्या जिलाध्यक्ष ने स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर कार्यकर्ताओं के बीच जाना उचित नहीं समझा।
क्या बांकीमोंगरा भाजपा में पदाधिकारियों के बीच तालमेल की कमी या पुराना मनमुटाव हावी हो गया है।

एकता पर सवालिया निशान
स्थापना दिवस के दिन जहां भाजपा पूरे देश में अपनी एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन कर रही है, वहीं बांकीमोंगरा की इस तस्वीर ने पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है। जिलाध्यक्ष का क्षेत्र में मौजूद रहकर भी अपने ही कार्यकर्ताओं के बीच न जाना, गुटबाजी की ओर स्पष्ट इशारा कर रहा है।
फिलहाल इस विषय पर न तो जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी का कोई बयान सामने आया है और न ही मंडल अध्यक्ष उदय शर्मा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। लेकिन दो कार्यक्रमों के बीच इस ‘दूरी’ ने आम कार्यकर्ताओं के उत्साह को मायूसी में बदल दिया है। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या आने वाले समय में यह गुटबाजी पार्टी के लिए कोई नई मुसीबत खड़ी करेगी

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