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विश्व सफाई दिवस पर बांकीमोंगरा के SECL कॉलोनियों में पसरी गंदगी, क्या निरीक्षण और आश्वासन तक ही सीमित है, स्वच्छता अभियान।

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बांकीमोंगरा में जगह-जगह कचरे के ढेर, सड़कों पर बह रहा गंदा पानी; 10 सितंबर के निरीक्षण के बाद भी हालात जस के तस।

छत्तीसगढ़/कोरबा आज 20 सितंबर को विश्व सफाई दिवस के अवसर पर जहां देशभर में स्वच्छता को लेकर जागरूकता और साफ-सफाई का संदेश दिया जा रहा है, वहीं कोरबा जिले के बांकीमोंगरा क्षेत्र स्थित एसईसीएल कॉलोनियों में स्वच्छता व्यवस्था की जमीनी तस्वीर कुछ अलग ही नजर आ रही है। क्षेत्र की विभिन्न कॉलोनियों और सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर, गंदगी और बदबूदार पानी की समस्या दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर नालियों और आसपास की गंदगी का पानी सड़क पर बह रहा है, जिससे राहगीरों और कॉलोनीवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

10 सितंबर को हुआ था निरीक्षण, जल्द समाधान का मिला था आश्वासन?
बताया जा रहा है कि बीते 10 सितंबर को एसईसीएल प्रबंधन की ओर से बांकीमोंगरा के कई क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया था। यह निरीक्षण क्षेत्र के कुछ पार्षदों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा कॉलोनियों में साफ-सफाई और जर्जर सड़कों से जुड़ी समस्याओं को लेकर शिकायत किए जाने के बाद किया गया था।
निरीक्षण के दौरान एसईसीएल अधिकारियों ने संबंधित जनप्रतिनिधियों को समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन दिया था। लेकिन विश्व सफाई दिवस के दिन भी यदि कॉलोनियों में कचरे के ढेर और गंदगी नजर आ रही है, तो इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि निरीक्षण के बाद अब तक धरातल पर कितना काम हुआ?

ठेकेदार पर कार्रवाई को लेकर भी उठ रहे सवाल?
कॉलोनियों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी संबंधित व्यवस्था और ठेकेदारों की होती है। इसके बावजूद यदि नियमित रूप से कचरा उठाव और सफाई नहीं हो रही है, तो एसईसीएल प्रबंधन द्वारा संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली की निगरानी और जवाबदेही तय करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल निरीक्षण करने और आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि नियमित सफाई, कचरा उठाव, नालियों की सफाई और गंदे पानी की निकासी की ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल?
क्षेत्र की समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा शिकायतें किए जाने के बाद निरीक्षण तो हुआ, लेकिन उसके बाद समस्या के समाधान की स्थिति क्या है, इसकी नियमित निगरानी कितनी हो रही है, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्व सफाई दिवस पर एसईसीएल कॉलोनियों की ऐसी तस्वीर निश्चित रूप से स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि एसईसीएल प्रबंधन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कब तक कॉलोनियों में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करता है।

स्थानीय रहवासियों की मांग है कि एसईसीएल प्रबंधन केवल निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर साफ-सफाई एवं सड़क-नाली से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।

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