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राज्यपाल से पुरस्कृत व्याख्याता कौशिल्या खुराना का आज बांकीमोंगरा में सम्मान समारोह।

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कोरबा/बांकीमोंगरा। कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा अंतर्गत वार्ड क्रमांक 06 शांतिनगर स्थित सामुदायिक भवन प्रांगण में आज राज्यपाल से पुरस्कृत व्याख्याता श्रीमती कौशिल्या खुराना का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन आज शाम 4 बजे किया गया है। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रवासी उपस्थित होकर श्रीमती खुराना का सम्मान करेंगे।
यह सम्मान उन्हें शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के साथ राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत किए जाने के उपलक्ष्य में दिया जा रहा है। आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। समाजसेवी संजय आजाद ने कहा कि कौशिल्या खुराना का राज्यपाल से सम्मानित होना पूरे समाज और क्षेत्र के लिए गौरव एवं हर्ष का विषय है।


छोटे से गांव से शुरू हुई प्रेरणादायी यात्रा?
श्रीमती कौशिल्या खुराना का जन्म छोटे से गांव सिंघनपुर में श्री कृपाराम निराला एवं श्रीमती तिहारिन बाई निराला की चतुर्थ संतान के रूप में हुआ। उनके पिता एसईसीएल में डंपर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे, जबकि माता गृहणी होने के साथ-साथ रामायण गायिका भी थीं।
बचपन से ही पढ़ाई के प्रति उनकी विशेष रुचि रही। उन्होंने हाईस्कूल तक की शिक्षा एनसीडीसी कोरबा से तथा हायर सेकेंडरी की शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोरबा से प्राप्त की। इसके बाद कॉलेज की पढ़ाई उन्होंने निजी छात्र के रूप में पूरी की।
1998 में शुरू हुआ शिक्षकीय सफर
एमए की पढ़ाई के दौरान वर्ष 1998 में शिक्षाकर्मी वर्ग-2 के रूप में उनकी प्रथम नियुक्ति हाई स्कूल श्यांग में हुई। यहां उन्हें कोरवा, पांडो, उरांव सहित विभिन्न जनजातीय एवं अन्य वर्गों के बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी मिली।
श्यांग जैसे दूरस्थ क्षेत्र में उन्होंने करीब 8 वर्षों तक बिना पंखे और बिजली के, लालटेन की रोशनी में अपना शिक्षकीय जीवन बिताया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने दायित्व से कभी पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।
श्यांग में कार्यकाल के दौरान उन्होंने सांस्कृतिक प्रभारी के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई और ग्रामवासियों एवं विद्यालय स्टाफ के सहयोग से रात्रिकालीन वार्षिकोत्सव जैसे कार्यक्रमों का आयोजन कराया।
विवाह के बाद भी जारी रहा शिक्षा का सफर?
2 जुलाई 2002 को उनका विवाह प्रकाश खुराना से हुआ। इसके बाद वे श्रद्धा खुराना एवं भूपेश खुराना की माताजी बनीं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपने शिक्षकीय एवं सामाजिक दायित्वों को भी निरंतर आगे बढ़ाया।
16 जनवरी 2007 को उनकी पदोन्नति व्याख्याता के रूप में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अरदा में हुई। यहां विषय अध्यापन के साथ-साथ उन्होंने विद्यार्थियों को सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
साहित्य के क्षेत्र में भी बनाई अलग पहचान?
अरदा से उनकी साहित्यिक यात्रा को नई दिशा मिली। विद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों के लिए वे स्वयं रचनाएं लिखने लगीं और उन्हें सस्वर प्रस्तुत करने का सिलसिला शुरू किया।
अब तक उनकी करीब 200 रचनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें से लगभग 35 रचनाएं साझा संकलन के रूप में पुस्तकों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं में कोरोना जागरूकता, नशामुक्ति, सामाजिक विषय, गुरु घासीदास एवं समाज की विभिन्न समस्याओं जैसे विषयों को प्रमुखता मिली है।
उनकी प्रकाशित रचनाएं ऑनलाइन माध्यमों पर भी उपलब्ध हैं।
नवाचारपूर्ण शिक्षण के लिए भी पहचान?
श्रीमती खुराना ने शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए अनेक नवाचार अपनाए हैं। कहानी को एकांकी और एकांकी को कहानी के रूप में परिवर्तित कर विद्यार्थियों को पढ़ाना, रोल प्ले एवं खेल गतिविधियों के माध्यम से पाठों का अभ्यास कराना उनकी शिक्षण शैली का हिस्सा रहा है।
वे ‘घीसा’ पाठ को बच्चों को पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाती हैं, वहीं कविता पाठ को लय एवं सस्वर वाचन के माध्यम से रुचिकर बनाती हैं। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं लेकर उन्हें अलग से मार्गदर्शन देना तथा आर्ट एंड क्राफ्ट के माध्यम से बच्चों की रचनात्मक क्षमता को विकसित करना भी उनके शिक्षण कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
लगभग 10 वर्षों से कक्षा 12वीं का वार्षिक परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहने की जानकारी भी सामने आई है।
शिक्षकों को भी दे चुकी हैं प्रशिक्षण
श्रीमती खुराना ने एससीईआरटी रायपुर, शंकर नगर में कक्षा 9वीं से 12वीं के नवीन पाठ्यक्रम एवं परख से संबंधित प्रशिक्षण में एमटी (मास्टर ट्रेनर) के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने डाइट कोरबा में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के व्याख्याताओं को प्रशिक्षण भी दिया है।
कक्षा 6वीं एवं 7वीं की नवीन पाठ्यपुस्तकों के एमटीएस के रूप में भी उन्होंने एससीईआरटी रायपुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया और डाइट कोरबा में माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया।
लगभग 400 सम्मान से हो चुकी हैं सम्मानित
श्रीमती कौशिल्या खुराना को शिक्षा, साहित्य, सामाजिक जागरूकता एवं मंच संचालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में अब तक लगभग 400 सम्मान-पत्र प्राप्त हो चुके हैं।
इनमें भारतीय गौरव अवॉर्ड (दिल्ली), स्वर्गीय कल्पना चावला सम्मान, महादेवी वर्मा सम्मान, रामधारी सिंह दिनकर सम्मान, कोरोना वारियर्स सम्मान, माता सावित्रीबाई फुले सम्मान, मिनीमाता प्रतिभा सम्मान, देवदास बंजारे पंथी सम्मान, उत्कृष्ट मंच उद्घोषक सम्मान एवं उत्कृष्ट कवयित्री सम्मान सहित अनेक सम्मान शामिल हैं।
उनके पढ़ाए विद्यार्थी आज विभिन्न पदों पर?
उनके द्वारा पढ़ाए गए अनेक विद्यार्थी आज एमबीबीएस, मेडिकल ऑफिसर, इंस्पेक्टर, शिक्षक सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनके करीब 28 वर्षों के शिक्षकीय जीवन की बड़ी उपलब्धियों में से एक है।
लगभग दो दशक से व्याख्याता के रूप में कार्यरत श्रीमती कौशिल्या खुराना ने अपने शिक्षकीय जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में निरंतर अपनी पहचान बनाई है।
राज्यपाल से सम्मानित होने के बाद बांकीमोंगरा में आयोजित यह सम्मान समारोह उनके लंबे शिक्षकीय एवं साहित्यिक सफर को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। क्षेत्रवासियों एवं समाज के लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण बताया है।

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