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लाइन परिचारक संविदा मानव संसाधन नीति 2025 का तीव्र विरोध।

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छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने नीति को बताया “शोषण का दस्तावेज

छत्तीसगढ़ /कोरबा पावर कंपनी प्रबंधन द्वारा आज जारी की गई “लाइन परिचारक संविदा मानव संसाधन नीति 2025” विवादों के घेरे में आ गई है। छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने इस नीति का कड़ा विरोध करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी करार दिया है।

विरोध के प्रमुख कारण (मुख्य बिंदु)

  • नियमितीकरण की अनदेखी: संघ का कहना है कि कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण (समायोजन) की मांग कर रहे हैं, लेकिन नई नीति में केवल सीमित लाभ देकर ‘अफसरशाही’ को बढ़ावा दिया गया है।
  • नियमों का उल्लंघन: प्रबंधन संविदा अधिनियम 2012 का हवाला देकर समायोजन से बच रहा है, जबकि खुद उसी अधिनियम में बिना शासन की अनुमति के संशोधन कर रहा है।
    • ​सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों (10 वर्ष की सेवा पर समायोजन) के बावजूद, नीति में 10 साल बाद भी मात्र 1-1 साल की सेवा वृद्धि के लिए अत्यंत कठोर शर्तें रखी गई हैं।
  • सुरक्षा मानकों से समझौता: नियमानुसार 33/11 केवी लाइन का परमिट केवल नियमित सहायक लाइनमैन या उससे ऊपर के अधिकारी ही दे सकते हैं। नई नीति में यह जोखिम भरी जिम्मेदारी संविदा कर्मचारियों पर थोपी जा रही है।
  • अधिकारियों की मनमानी: कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे 8 घंटे के बजाय 24 घंटे काम लिया जाता है। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में दोष संविदा कर्मचारी पर मढ़कर उनकी सेवा वृद्धि रोक दी जाती है।

संघ की आगामी रणनीति

​विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष (बिलासपुर) VP बंजारे ने स्पष्ट किया है कि:

  1. ​संघ अब केवल “समायोजन” की एक सूत्रीय मांग पर अड़ा रहेगा।
  2. ​पावर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ इस नीति का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
  3. ​यदि प्रबंधन ने सकारात्मक पहल नहीं की, तो जल्द ही अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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