मां मड़वारानी पहाड़ में अटूट आस्था, लेकिन अंधेरे में सफर करने को मजबूर श्रद्धालु; सात साल से दर्शन कर रही महिला ने भी बताई परेशानी।
गौतम कुमार संवाददाता उरगा!
कोरबा–चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित मां मड़वारानी पहाड़ कोरबा और चांपा क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि समाप्त हो चुकी है, लेकिन माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला अब भी जारी है। कोई उपवास रखकर तो कोई कठिन धार्मिक परंपरा निभाते हुए माता के दरबार तक पहुंच रहा है। मगर इस अटूट आस्था के बीच बुनियादी सुविधाओं की कमी श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा रही है।
गुरुवार की रात यहां एक परिवार उपवास रखकर जमीन पर लेटते हुए पहाड़ की ओर बढ़ता दिखाई दिया। रास्ते में अंधेरा होने के कारण परिवार टॉर्च की रोशनी के सहारे आगे बढ़ रहा था। जब उनसे परेशानी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से मां मड़वारानी के दर्शन के लिए आ रहे हैं, लेकिन लाइट, पानी और सड़क से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं, कोरबा से पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वह पिछले सात वर्षों से लगातार माता के दर्शन के लिए आ रही हैं, लेकिन रात के समय रोशनी की समस्या आज भी बनी हुई है।
सबसे गंभीर स्थिति मंदिर तक पहुंचने वाले लगभग पांच किलोमीटर के मार्ग की है, जहां लगी स्ट्रीट लाइटें जलती नजर नहीं आ रही हैं। कहीं खंभों के बीच लाइटें लगी होने के बावजूद रोशनी नहीं है, तो कहीं श्रद्धालुओं को टॉर्च के सहारे रास्ता तय करना पड़ रहा है। आसपास जंगल होने के कारण अंधेरे में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सवाल यह है कि जब मां मड़वारानी पहाड़ में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुंचते हैं, तो उन्हें रोशनी और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान क्यों होना पड़ रहा है? मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग की स्ट्रीट लाइटों की देखरेख की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? संबंधित विभाग, प्रशासन और मंदिर समिति इस समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
मां मड़वारानी पहाड़ लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा धार्मिक स्थल है। ऐसे में यहां आने वाले भक्तों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। अब जरूरत है कि जिम्मेदार लोग इस समस्या को गंभीरता से लें, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराएं और पेयजल व सड़क की व्यवस्था पर भी ध्यान दें, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ उनकी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा जा सके।
