देवरी-सलिहा नाला मार्ग फिर धसा, आवागमन प्रभावित: हेमलता कंवर।
ग्रामीणों, मजदूरों, स्कूली बसों और एंबुलेंस की आवाजाही पर संकट; वर्षों से बनी समस्या के स्थायी समाधान की मांग।
छत्तीसगढ़/कोरबा कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के देवरी सलिहा नाला से होकर दीपका को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग एक बार फिर क्षतिग्रस्त होकर धंस गया है। मार्ग के धंसने के कारण इस रास्ते से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। यह मार्ग क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के साथ-साथ कोल माइंस में काम करने वाले मजदूरों, स्कूली बसों, मरीजों और एंबुलेंस के लिए भी महत्वपूर्ण है। सड़क की मौजूदा स्थिति के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि देवरी सलिहा नाला मार्ग लंबे समय से बदहाली का सामना कर रहा है। बारिश के दौरान नाले और मार्ग पर पानी का दबाव बढ़ने से कई बार सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इस बार भी मार्ग का एक हिस्सा धंस जाने के बाद स्थिति गंभीर हो गई है। चारपहिया वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ ही दोपहिया वाहन चालकों को भी जोखिम उठाकर क्षतिग्रस्त हिस्से को पार करना पड़ रहा है।
जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर ग्रामीण:-
मार्ग बाधित होने के बावजूद ग्रामीण और कोल माइंस में कार्यरत मजदूर अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के कारण इस रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। कई लोग अपनी मोटरसाइकिल लेकर धंसे हुए हिस्से को पार कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी समय दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। खासकर रात के समय इस मार्ग से गुजरना और भी जोखिम भरा बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है। स्कूल बसों और एंबुलेंस के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। यदि किसी मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ती है, तो मार्ग की खराब स्थिति परेशानी को और बढ़ा सकती है।
शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान:-
ग्रामीणों के अनुसार मार्ग की समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार मार्ग क्षतिग्रस्त होने के बाद केवल अस्थायी मरम्मत कर दी जाती है, लेकिन कुछ समय बाद बारिश या भारी वाहनों के दबाव में सड़क दोबारा खराब हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग को केवल कामचलाऊ तरीके से सुधारने के बजाय शुरुआत से ही मजबूत और गुणवत्तापूर्ण तरीके से निर्माण किया जाना चाहिए, ताकि बार-बार सड़क धंसने और आवागमन बाधित होने की समस्या से लोगों को निजात मिल सके।
हेमलता कंवर ने सरकार और एसीबी प्रबंधन पर साधा निशाना:-
कटघोरा ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की सचिव हेमलता कंवर ने मार्ग की बदहाली को लेकर स्थानीय सरकार और एसीबी प्रबंधन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देवरी-सलिहा नाला मार्ग की समस्या आज की नहीं, बल्कि बीते कई वर्षों से बनी हुई है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में गंभीर पहल नहीं की जा रही है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में कोयला खनन गतिविधियों के कारण भारी वाहनों का आवागमन भी होता है, जिसका असर मार्ग पर पड़ता है। इसके बावजूद सड़क की मजबूती और स्थायी निर्माण को लेकर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार एसीबी प्लांट की ओर से नाले के निर्माण और मरम्मत से संबंधित कार्य किए जाने के बाद भी यदि मार्ग बार-बार धंस रहा है, तो कार्य की गुणवत्ता और स्थायित्व पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हेमलता कंवर ने कहा कि ग्रामीणों को बार-बार आश्वासन या अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए। उन्होंने संबंधित विभाग और एसीबी प्रबंधन से मांग की कि मौके का निरीक्षण कर मार्ग की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में मजबूत निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों ने की स्थायी निर्माण की मांग:-
ग्रामीणों का कहना है कि देवरी-सलिहा नाला मार्ग केवल एक सामान्य सड़क नहीं, बल्कि आसपास के गांवों और दीपका क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, मजदूर, विद्यार्थी और अन्य लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में मार्ग का बार-बार धंसना लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित प्रबंधन से तत्काल मौके पर पहुंचकर मार्ग को सुरक्षित बनाने तथा आवागमन बहाल करने की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो, इसके लिए नाले और सड़क का स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने की मांग उठाई गई है।
अब देखना होगा कि बार-बार सामने आ रही इस समस्या के बाद जिम्मेदार विभाग और एसीबी प्रबंधन कब तक इस मार्ग की सुध लेते हैं और ग्रामीणों को अस्थायी मरम्मत से आगे बढ़कर स्थायी समाधान कब मिलता है।
