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बांकीमोंगरा थाना परिसर में जब्त ट्रक से चोरी: वैज्ञानिक सीन ऑफ क्राइम यूनिट ने संभाली जांच, कई सवालों के घेरे में पूरी घटना।

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छत्तीसगढ़/कोरबा जिले के बांकीमोंगरा थाना परिसर में जब्त खड़ी एक ट्रक से हुई कथित चोरी की घटना ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार को वैज्ञानिक सीन ऑफ क्राइम यूनिट कोरबा की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर आवश्यक भौतिक साक्ष्य एकत्र किए। अब पुलिस वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले माइनिंग विभाग ने ओवरलोड गिट्टी का परिवहन करते हुए ट्रक क्रमांक CG-30-F-8112 को पकड़कर कार्रवाई की थी। इसके बाद वाहन को जब्त कर बांकीमोंगरा थाना परिसर में खड़ा कराया गया था।

ट्रक से कुछ सामान गायब, शीशा टूटा मिला
वाहन मालिक के अनुसार ट्रक में रखा जैक रॉड, टोचन, टेप रिकॉर्डर/साउंड सिस्टम तथा चालक का बैग (झोला), जिसमें कपड़े एवं अन्य आवश्यक सामान रखा था, अज्ञात व्यक्ति चोरी कर ले गए। चोरी को अंजाम देने के लिए ट्रक के ड्राइवर साइड के दरवाजे का शीशा भी तोड़ दिया गया।
वाहन मालिक ने बताया कि वह 10 जुलाई को थाना परिसर पहुंचकर अपने वाहन का निरीक्षण कर चुका था। उस समय वाहन पूरी तरह सुरक्षित था। लेकिन 12 जुलाई को दोबारा निरीक्षण करने पर उसने देखा कि ड्राइवर साइड का शीशा टूटा हुआ है और ट्रक के भीतर रखा सामान गायब है। इसके बाद उसने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
वैज्ञानिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी। सोमवार को वैज्ञानिक सीन ऑफ क्राइम यूनिट, कोरबा की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ट्रक से संभावित फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए। जांच के दौरान ट्रक के केबिन के अंदर राखड़ ईंट का एक छोटा टुकड़ा भी मिला, जिसे टीम ने जब्त कर जांच के लिए सुरक्षित रखा है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है तथा सभी पहलुओं पर पड़ताल जारी है।

थाना प्रभारी ने क्या कहा
थाना प्रभारी चमन लाल सिन्हा ने बताया कि चोरी के मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने तक घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करना उचित नहीं होगा। थाना प्रभारी का वह दावा अब सच होता दिख रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुरक्षित थाना परिसर से चोरी होना व्यावहारिक रूप से मुमकिन नहीं है। फॉरेंसिक रिपोर्ट के इन शुरुआती सुरागों के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान इस बात पर है कि आखिर वो कौन है जिसने अंदर बैठकर शीशा तोड़ा और इस पूरी घटना को ‘चोरी’ का रूप देने की कोशिश की? इसके पीछे का असली मकसद क्या था?

ट्रक मालिक ने कैमरे पर कुछ भी कहने से किया इनकार?
इस मामले में ट्रक मालिक से वीडियो बाइट लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कैमरे के सामने कोई बयान देना उचित नहीं समझा।

पुलिस में शिकायत करने से पहले ही मीडिया में खबर चलवाना भी समझ से परे है?
जानकारी के अनुसार वाहन मालिक का कहना है की मीडिया वालो ने फ़ोन कर जानकारी मांगा जबकि वाट्सअप ग्रुप में स्वयं ने पोस्ट किया था,बिना पुलिस में शिकायत किए स्वयं से मीडिया वालों को खबर करने जिस तरह से तेज़ी दिखायी गई वह भी संदेह के घेरे में आता है।

घटना से जुड़े कई अहम सवाल?
यह मामला केवल चोरी तक सीमित है या इसके पीछे कोई अन्य पहलू भी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल घटना कई सवाल खड़े कर रही है—
यदि 10 जुलाई 2026 को वाहन पूरी तरह सुरक्षित था, तो 12 जुलाई को वाहन मालिक दोबारा निरीक्षण करने किस कारण पहुंचे?
टूटे हुए कांच का अधिकांश हिस्सा ट्रक के बाहर और कुछ दूरी पर मिला, जबकि केबिन के अंदर कांच दिखाई नहीं दे रहे हैं। यदि शीशा बाहर से तोड़ा गया, तो कांच अंदर अधिक मात्रा में क्यों नहीं बिखरा?
क्या पहले शीशा तोड़ा गया या पहले किसी अन्य तरीके से केबिन में प्रवेश किया गया? यदि दरवाजा लॉक था, तो वह कैसे खुला?
थाना परिसर जैसी सुरक्षित जगह पर दिन हो या रात, इतनी बड़ी तोड़फोड़ और चोरी कैसे हो गई? शीशा टूटने की आवाज किसी ने क्यों नहीं सुनी और किसी की नजर घटना पर क्यों नहीं पड़ी?
क्या यह वास्तव में केवल चोरी की घटना है या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है? इसका खुलासा जांच के बाद ही होगा।

माइनिंग विभाग द्वारा जब्त की गई गाड़ियां अक्सर लगभग एक माह के भीतर छूट जाती हैं।
चर्चा करने वालों का यह भी तर्क है कि यदि किसी का वास्तविक उद्देश्य चोरी करना होता, तो सबसे पहले डीजल, बैटरी या अन्य अधिक मूल्यवान सामान को निशाना बनाया जाता। इसके बजाय जैक, रॉड, टोचन जैसी अपेक्षाकृत कम मूल्य की वस्तुओं का गायब होना लोगों के बीच कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। छोटे चीज के लिए थाना परिसर में घुसकर इसका चोरी करना समझ से परे है हालांकि, इन चर्चाओं और आशंकाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है तथा मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

घटनास्थल से मिला राखड़ ईंट का छोटा टुकड़ा क्या वास्तव में ट्रक का शीशा तोड़ने में इस्तेमाल हुआ, या घटना में किसी अन्य वस्तु का प्रयोग किया गया? इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रथम दृष्टया ऐसी आशंका जताई जा रही है कि 10 जुलाई को वाहन मालिक द्वारा संभवतः जानबूझकर ड्राइवर साइड का दरवाजा लॉक नहीं किया गया था। बताया जा रहा है कि उसी खुले दरवाजे से अंदर प्रवेश कर चालक सीट पर बैठकर ड्राइवर साइड की खिड़की का शीशा तोड़ा गया।
सूत्रों का दावा है कि इस आशंका को घटनास्थल पर मिले कुछ संकेत बल देते हैं। वाहन की चालक सीट पर कांच का कोई टुकड़ा नहीं मिला, जबकि अधिकांश कांच वाहन के बाहर काफी दूरी तक बिखरा हुआ पाया गया। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति तब बन सकती है, जब शीशे पर अंदर की ओर से प्रहार किया गया हो। वहीं, वाहन के अंदर मिला फ्लाई ऐश का छोटा टुकड़ा देखकर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि उससे शीशा तोड़ पाना संभव प्रतीत नहीं होता।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें?
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की जांच जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वैज्ञानिक जांच से क्या तथ्य सामने आते हैं, चोरी की इस वारदात का खुलासा कब तक होता है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

नोट: ऊपर दिए गए सवाल घटनास्थल पर दिखाई देने वाली परिस्थितियों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उठाए गए हैं। इनका उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुंचना नहीं, बल्कि जांच के विभिन्न पहलुओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है। अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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