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बांकीमोंगरा क्षेत्र में जल संकट को लेकर विकास झा ने जताई नाराजगी, जिम्मेदार अधिकारियों को अतिशीघ्र हल करने का किया अपील।

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छत्तीसगढ़/कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा क्षेत्र में लगातार गहराते जल संकट को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की चिंता बढ़ने लगी है। क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति की अव्यवस्था के कारण हजारों परिवार प्रभावित हैं और लोगों को प्रतिदिन पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा की अध्यक्षा सोनी कुमारी के पति विकास झा ने विभागीय अधिकारी हितेश से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा कर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया तथा जल संकट के स्थायी समाधान हेतु तत्काल कदम उठाने की मांग की।
बातचीत के दौरान विकास झा ने कहा कि बांकीमोंगरा क्षेत्र की लगभग 65 हजार की आबादी वर्तमान में जल आपूर्ति व्यवस्था की खामियों का खामियाजा भुगत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बांकीमोंगरा के साथ लंबे समय से सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उनके अनुसार क्षेत्र के लिए निर्धारित जलापूर्ति नगर निगम की व्यवस्था पर निर्भर है, जहां पहले पानी निगम की टंकियों में संग्रहित किया जाता है और उसके बाद बांकीमोंगरा की ओर आपूर्ति की जाती है। ऐसी स्थिति में यदि नगर निगम क्षेत्र में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी, मोटर या पंप में समस्या आती है, तो उसका सीधा असर बांकीमोंगरा की जनता पर पड़ता है और लोगों को कई दिनों तक पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।
विकास झा ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था क्षेत्र की बढ़ती आबादी और आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतनी बड़ी जनसंख्या को स्थायी और निर्बाध जलापूर्ति उपलब्ध कराने के लिए बांकीमोंगरा में स्वतंत्र वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) की स्थापना अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि नगर निगम का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्वयं अपने क्षेत्र की मांग पूरी करने में संघर्ष कर रहा है, ऐसे में बांकीमोंगरा को उसी व्यवस्था पर निर्भर रखना भविष्य में और गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि जल संकट से जूझ रहे नागरिकों को राहत पहुंचाने के लिए वे स्वयं अपने स्तर पर बोरवेल खुदवाने तथा टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह केवल अस्थायी व्यवस्था है। उनका कहना है कि समस्या का वास्तविक समाधान केवल एक स्वतंत्र और आधुनिक जल शोधन संयंत्र की स्थापना से ही संभव है।
दूरभाष चर्चा के दौरान विकास झा ने विभाग द्वारा कराए गए प्रारंभिक सर्वे और परियोजना प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी सर्वे में पानी की उपलब्धता या परियोजना की संभावनाओं का आकलन किया गया है, तो उसमें स्थानीय नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक और वास्तविक परिस्थितियों को जाने बिना तैयार की गई रिपोर्टें जमीनी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि स्वतंत्र वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) शीघ्र तैयार कर उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
इस संबंध में विभागीय अधिकारी हितेश ने आश्वस्त किया कि जल संकट के विषय को गंभीरता से लिया जा रहा है तथा उच्च स्तर पर भी इस संबंध में चर्चा की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आगामी सोमवार को विभागीय टीम, जिसमें संबंधित अधिकारी, सीएमओ और इंजीनियर शामिल रहेंगे, बांकीमोंगरा का दौरा करेगी। टीम क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर आवश्यक तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करेगी तथा डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
विकास झा ने उम्मीद जताई कि विभागीय निरीक्षण के बाद क्षेत्र की वर्षों पुरानी जल समस्या के समाधान की दिशा में ठोस पहल होगी। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे क्षेत्रवासियों के हितों की रक्षा के लिए आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बांकीमोंगरा की जनता की मूलभूत आवश्यकता को प्राथमिकता देते हुए जल संकट के स्थायी समाधान हेतु शीघ्र निर्णय लिया जाए।

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