बच्चों की लड़ाई के बाद खुली बांकीमोंगरा सनसाइन स्कूल की व्यवस्था की पोल।
जर्जर कक्षाओं, सीपेज, गंदगी और असुरक्षित परिसर के बीच पढ़ने को मजबूर विद्यार्थी।
छत्तीसगढ़/कोरबा कोरबा जिले के बांकीमोंगरा सनसाइन स्कूल में दो दिन पहले छात्रों के दो गुटों के बीच हुई मारपीट का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। छात्रों के विवाद के बाद दोनों पक्षों के परिजन थाने पहुंचे। आपसी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने शिकायत वापस लेकर बच्चों को समझाइश देने पर सहमति जताई। पुलिस ने भी बच्चों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच विद्यालय परिसर की कथित बदहाल स्थिति ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि छात्रों के बीच विवाद होने के तत्काल बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से पुलिस को सूचना नहीं दी गई और करीब 24 घंटे बाद, वह भी परिजनों के दबाव के बाद थाने में सूचना देने की प्रक्रिया शुरू हुई। यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामले में तत्काल पुलिस और अभिभावकों को सूचना क्यों नहीं दी गई।
जर्जर कक्षाओं और सीपेज ने बढ़ाई चिंता!
विद्यालय परिसर के निरीक्षण के दौरान कई कक्षाओं में सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आने की बात सामने आई है। कुछ कमरों में सीपेज के कारण पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई है। वहीं कक्षाओं की छतों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। कई स्थानों पर छत के हिस्से जर्जर होकर टूटे हुए दिखाई देने की बात सामने आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर है। यदि जर्जर भवन में रोजाना बच्चे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं तो किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
खिड़कियों पर सुरक्षा का अभाव, बाहर झाड़ियां बनीं चिंता!
विद्यालय की कुछ कक्षाओं की खिड़कियों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। वहीं खिड़कियों के बाहर बड़ी-बड़ी जंगली घास और झाड़ियां उगी हुई दिखाई देने से भी विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए नियमित साफ-सफाई, भवन का रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है। ऐसे में सवाल यह है कि इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी आखिर किस स्तर पर की जा रही है।
बाथरूम तक पहुंचने में भी परेशानी!
विद्यालय के बाथरूम की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि बाथरूम स्कूल भवन के पीछे स्थित है और वहां तक जाने वाले रास्ते के आसपास बड़ी-बड़ी घास एवं झाड़ियां उगी हुई हैं। ऐसी स्थिति में छोटे बच्चों को बाथरूम तक पहुंचने में परेशानी के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी चिंता भी बनी रहती है।
स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय किसी भी विद्यालय की मूलभूत आवश्यकता है। ऐसे में बाथरूम की साफ-सफाई और वहां तक सुरक्षित पहुंच की व्यवस्था सुनिश्चित करना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
स्कूल को मिलने वाले फंड के उपयोग पर भी उठे सवाल!
विद्यालय के रखरखाव, साफ-सफाई, मूलभूत सुविधाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विभागीय स्तर पर मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यदि विद्यालय को विकास या रखरखाव के लिए किसी मद में राशि प्राप्त होती है, तो जर्जर छत, सीपेज, गंदगी, खराब बाथरूम और सुरक्षा संबंधी कमियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं? वहीं यदि पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं है तो क्या स्कूल प्रबंधन ने संबंधित विभाग के समक्ष इसकी मांग की है?
ऐसे में विद्यालय को प्राप्त होने वाले फंड, उसके मदवार उपयोग और कराए गए कार्यों का विवरण सामने आना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
शिक्षकों ने भी वेतन को लेकर जताई नाराजगी
मामले के दौरान कुछ शिक्षकों की ओर से कथित तौर पर दो-दो महीने से वेतन नहीं मिलने की बात भी सामने आई। यदि यह दावा सही है तो यह भी गंभीर प्रशासनिक विषय है। शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने की स्थिति में इसका असर विद्यालय के संचालन और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस संबंध में स्कूल प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करते हुए यह बताना चाहिए कि शिक्षकों के वेतन में देरी क्यों हो रही है और भुगतान की क्या स्थिति है।
शाला विकास समिति और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल!
विद्यालय भवन, सफाई, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर यदि लंबे समय से समस्याएं बनी हुई हैं तो शाला विकास समिति और संबंधित शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या विद्यालय का नियमित निरीक्षण किया जाता है?
क्या जर्जर भवन की स्थिति की जांच की गई है?
क्या विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित है?
क्या शिक्षकों को समय पर वेतन मिल रहा है?
यदि निरीक्षण में कमियां मिलीं तो उन्हें दूर करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
प्राचार्य से जवाब मांगने पर स्पष्टता का अभाव
विद्यालय के प्राचार्य सुरेश सर से विद्यालय की व्यवस्थाओं और सामने आई शिकायतों को लेकर सवाल किए जाने पर उनके जवाब में स्पष्टता नहीं मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन से अपेक्षा है कि वह विद्यालय की व्यवस्थाओं से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दे और अभिभावकों के बीच बनी चिंता को दूर करे।
मामला सिर्फ बच्चों की लड़ाई का नहीं, सुरक्षा और व्यवस्था का भी
छात्रों के बीच विवाद किसी भी विद्यालय में हो सकता है, लेकिन मामला तब गंभीर हो जाता है जब विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता, भवन की मजबूती और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार सवाल सामने आएं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग और शाला विकास समिति इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय का निरीक्षण करती है या नहीं। जरूरत इस बात की है कि विद्यालय की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच हो, कमियों को चिन्हित कर उनका निराकरण कराया जाए और विद्यार्थियों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक छात्र विवाद का नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिक्षा और भविष्य का है।
