आदिवासी समाज का फूटा गुस्सा, 18 जून को अरदा चौक में चक्काजाम और 19 को बांकीमोंगरा थाना घेराव का एलान।
अजीत कुमार संवाददाता बांकीमोंगरा:
मामला: टीएमसी कंपनी के अधिकारी पर आदिवासी महिलाओं और किसान से अभद्रता व जातिसूचक गाली-गलौज का आरोप।
नाराजगी: शिकायत के बाद भी पुलिस द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई या एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं।
चेतावनी: जनपद सदस्य श्रवण कुमार तंवर और आदिवासी समाज ने आंदोलन के लिए प्रशासन को सौंपा पत्र।
छत्तीसगढ़/कोरबा जिले के बांकीमोंगरा क्षेत्र में टीएमसी (TMC) कंपनी से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कथित रूप से जातिगत अपमान, अभद्रता और जान से मारने की धमकी के मामले में पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। अब इस गुस्से के सड़क पर उतरने की पूरी तैयारी हो चुकी है।
जनपद सदस्य श्रवण कुमार तंवर और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक (SP) सहित अन्य संबंधित विभागों को पत्र सौंपा है। इसमें साफ चेतावनी दी गई है कि यदि पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिला और आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला।
सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, यह घटना 27 मई 2026 की है। आरोप है कि टी.एम.सी. कंपनी के एक अधिकारी के.के. सिंह ने लालपुर की आदिवासी महिलाओं और अरदा निवासी आदिवासी किसान शंकर सिंह के साथ कथित तौर पर जातिसूचक गाली-गलौज की और उन्हें जान से मारने की धमकी दी।
कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश।
घटना के तुरंत बाद मामले की लिखित शिकायत बांकीमोंगरा थाना, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और अन्य उच्चाधिकारियों को दी गई थी। लेकिन आदिवासी समाज का आरोप है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने न तो अपराध दर्ज किया है और न ही कोई प्रभावी कदम उठाया है।
18 को चक्काजाम और 19 को थाना घेराव
प्रशासन की इसी कथित निष्क्रियता और ढुलमुल रवैए के विरोध में आदिवासी समाज ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान कर दिया है, जिसकी औपचारिक सूचना प्रशासन को भेज दी गई है।
18 जून 2026 को अरदा चौक पर सुबह से अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा।
19 जून 2026 को बांकीमोंगरा थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
आदिवासी समाज के प्रमुखों का कहना है कि जब तक आरोपी अधिकारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, उनका यह न्याय युद्ध थमेगा नहीं। इस एलान के बाद से क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।


