जंतर-मंतर पर गूंजी कोरबा के भू-विस्थापितों की आवाज, ‘चौकीदार को बोलो, मालिक आए हैं’ के नारों से युवा कांग्रेस का प्रदर्शन।
चित्रकांत पंथ कि रिपोर्ट:
दिल्ली में SECL और केंद्र सरकार के खिलाफ बुलंद हुई आवाज, मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और प्रदूषण नियंत्रण की मांग तेज।
कोरबा जिले के कोयला खदानों से प्रभावित भू-विस्थापित परिवारों के समर्थन में युवा कांग्रेस ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन में युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष विकास सिंह अपने साथियों के साथ शामिल हुए और SECL की कथित मनमानी, बढ़ते प्रदूषण तथा भू-विस्थापितों की वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार और प्रबंधन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में “SECL जवाब दो” लिखी तख्तियां लेकर अपनी मांगों को बुलंद किया। वहीं “चौकीदार को बोलो, मालिक आए हैं” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा जंतर-मंतर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि देश को ऊर्जा देने वाले कोरबा क्षेत्र के हजारों खदान प्रभावित परिवार आज भी अपने मूल अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है।
युवा कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कोरबा देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, जहां से पूरे देश को ऊर्जा मिलती है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों को विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण, रोजगार की कमी और अधूरे पुनर्वास जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि SECL प्रभावित परिवारों की मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है।
ग्रामीण जिला अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि कोयला खदानों के विस्तार के लिए हजारों परिवारों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन आज भी अनेक प्रभावित परिवार उचित मुआवजा, स्थायी पुनर्वास और रोजगार से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि खदानों से फैलने वाली धूल और प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस ने मांग की कि लंबित मुआवजा और पुनर्वास मामलों का शीघ्र निराकरण किया जाए, स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराया जाए तथा प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय तत्काल लागू किए जाएं।
प्रदर्शन के समापन पर कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि SECL प्रबंधन और केंद्र सरकार ने जल्द ही भू-विस्थापितों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरबा के भू-विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुकी है।
