बांकीमोंगरा का एसईसीएल गार्डन बदहाल, कचरे के ढेर में गुम हुई बच्चों की किलकारियां; रखरखाव पर उठे सवाल।

छत्तीसगढ़/बांकीमोंगरा। कभी बच्चों की किलकारियों, सुबह-शाम की सैर और लोगों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाला बांकीमोंगरा का एसईसीएल गार्डन आज बदहाली और कचरे के ढेर के बीच अपनी पहचान खोता नजर आ रहा है। कभी क्षेत्रवासियों के मनोरंजन और स्वास्थ्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा यह गार्डन अब देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार होता दिखाई दे रहा है।
बांकीमोंगरा क्षेत्र में एसईसीएल का यह प्रमुख सार्वजनिक गार्डन लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां बच्चे खेलने के लिए पहुंचते थे, वहीं लोग सुबह-शाम टहलने, व्यायाम और जिम जैसी गतिविधियों के लिए भी इसका उपयोग करते थे। लेकिन समय के साथ गार्डन के रखरखाव में कमी आने से इसकी स्थिति लगातार खराब होती गई।
विकास और जीर्णोद्धार की मांग के बावजूद नहीं बदली तस्वीर?
गार्डन के विकास, साफ-सफाई और जीर्णोद्धार की मांग स्थानीय लोगों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर उठाई जाती रही है। इसके बावजूद गार्डन की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते गार्डन का उचित रखरखाव और सौंदर्यीकरण किया जाता तो यह आज भी क्षेत्र के लोगों के लिए एक बेहतर सार्वजनिक स्थल बना रह सकता था।
गार्डन परिसर में कचरा फेंके जाने की शिकायत
सबसे गंभीर समस्या गार्डन परिसर में जगह-जगह दिखाई दे रहे कचरे को लेकर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसईसीएल कॉलोनी क्षेत्र से निकलने वाला कचरा भी गार्डन के आसपास या परिसर में फेंका जा रहा है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था से जुड़े लोगों द्वारा भी यहां कचरा डाले जाने की शिकायत सामने आ रही है।
वहीं, नगर क्षेत्र से निकलने वाले कचरे को भी गार्डन के आसपास फेंका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की संबंधित विभागों से आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
कचरे के कारण गार्डन का वातावरण प्रभावित हो रहा है। जगह-जगह प्लास्टिक, पन्नियां और अन्य अपशिष्ट पड़े होने से दुर्गंध की स्थिति भी बनी हुई है।
मवेशियों के लिए भी बढ़ा खतरा?
गार्डन परिसर में बिखरे प्लास्टिक और खाद्य अपशिष्ट के कारण मवेशी भी यहां पहुंच रहे हैं। भोजन की तलाश में मवेशियों द्वारा प्लास्टिक की पन्नियां खाए जाने की स्थिति पशुओं के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वच्छता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसईसीएल और नगर पालिका से ठोस पहल की मांग?
स्थानीय लोगों का कहना है कि एसईसीएल को अपने सामाजिक दायित्व के तहत गार्डन के संरक्षण और विकास की दिशा में पहल करनी चाहिए। साथ ही, नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा को भी कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।
लोगों की मांग है कि गार्डन परिसर की तत्काल सफाई कराई जाए, कचरा फेंकने पर रोक लगाई जाए और नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही गार्डन का सौंदर्यीकरण, खेल सामग्री, जिम उपकरण और अन्य सुविधाओं को पुनः व्यवस्थित किया जाए।
कभी बच्चों की किलकारियों और लोगों की चहल-पहल से जीवंत रहने वाला यह गार्डन यदि समय रहते नहीं संभाला गया, तो क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता खो सकता है।
अब देखना होगा कि एसईसीएल प्रबंधन और नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा इस समस्या को लेकर कब तक ठोस कदम उठाते हैं और क्या यह गार्डन फिर से क्षेत्रवासियों के लिए मनोरंजन, स्वास्थ्य और सैर-सपाटे का बेहतर केंद्र बन पाता है।
