बांकीमोंगरा क्षेत्र में नम आंखों से मां नवदुर्गा को दी गई विदाई, डीजे और करमा-बाजा की धुन के साथ हुआ मुर्ति विसर्जन।
नौ दिनों की पूजा-अर्चना के बाद विधि-विधान से हुआ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन, भक्तों ने अगले वर्ष फिर आने की कामना के साथ दी विदाई।
बांकीमोंगरा। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, आराधना और जयकारों से गुंजायमान रहने वाला बांकीमोंगरा क्षेत्र माता रानी की विदाई के साथ भावुक हो उठा। नवरात्रि पर्व संपन्न होने के पश्चात क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर स्थापित मां नवदुर्गा की प्रतिमाओं का विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने नम आंखों से माता रानी को विदाई दी और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना की।
बांकीमोंगरा क्षेत्र के शांतिनगर, मनोरंजन मंदिर क्लब, जंगल साइड, कुधरीपारा ( रेस्ट हाउस चौक ) , गजरा एवं कटाईनार सहित विभिन्न स्थानों पर विराजित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। डीजे और पारंपरिक करमा-बाजा की धुन पर श्रद्धालु विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। माता रानी के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
नौ दिनों तक माता की सेवा, पूजा-अर्चना और आराधना में लीन रहे श्रद्धालुओं के लिए विदाई का क्षण भावुक कर देने वाला रहा। जैसे-जैसे मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए आगे बढ़ीं, वैसे-वैसे भक्तों की आंखें नम होती गईं। श्रद्धालुओं ने मां से परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र की खुशहाली और सभी के जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की।
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता रानी को अंतिम विदाई दी। पूरे नवरात्रि के दौरान क्षेत्र में भक्ति, आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा। विभिन्न दुर्गा पूजा समितियों एवं श्रद्धालुओं के सामूहिक सहयोग से पर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
अगले बरस फिर आना मां…।
मां दुर्गा की विदाई के साथ ही नवरात्रि उत्सव का समापन हो गया, लेकिन भक्तों के मन में माता रानी के प्रति आस्था और श्रद्धा पहले की तरह बनी रही। नम आंखों से विदाई देते हुए श्रद्धालुओं ने एक ही कामना की—मां नवदुर्गा अगले वर्ष फिर आएं और सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।






