बांकीमोंगरा नगर पालिका में सियासी घमासान, पार्षदों ने लगाया धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप, संयुक्त संचालक से की शिकायत।
बांकीमोंगरा नगर पालिका में सियासी घमासान, पार्षदों ने लगाया धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप, संयुक्त संचालक से की शिकायत।

छत्तीसगढ़/कोरबा नवगठित नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में मचे सियासी घमासान ने अब नया मोड़ ले लिया है। वार्ड पार्षदों ने एक पत्र जारी कर आरोप लगाया है कि उन्हें गुमराह करके और धोखे से एक शिकायत पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे, जिसका वे अब कड़े शब्दों में खंडन कर रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बांकीमोंगरा नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास द्वारा परिषद की कार्यप्रणाली और संचालक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों में कहा गया था कि वार्डों में कार्यों को लेकर भेदभाव किया जा रहा है और पार्षद निधि रोक दी गई है। साथ ही टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता (बंदरबांट) के आरोप भी लगाए गए थे।
वही कांग्रेस के पार्षदों ने संयुक्त संचालक, नगरीय निकाय (बिलासपुर) को पत्र लिखकर इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और असत्य बताया है। पार्षदों का कहना है कि निधि आवंटन सभी 30 वार्डों में पार्षद निधि का आवंटन नियमानुसार और समय पर किया जा रहा है। भेदभाव के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
परिषद की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी है, जिसमें किसी भी प्रकार का मनमाना कार्य संभव नहीं है।
पार्षदों ने स्पष्ट किया कि उन्हें गुमराह कर पिछले पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे, जिसका वे अब सामूहिक रूप से खंडन करते हैं।
पार्षदों ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संसाधन और स्टाफ की कमी के बावजूद एक वर्ष के अल्प कार्यकाल में निकाय के नेतृत्व में विकास कार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस खंडन पत्र की प्रतियां उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव, सांसद ज्योत्स्ना महंत, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कोरबा को भी भेजी गई हैं।
इस विरोध पत्र में मुख्य रूप से श्रीमती रूबी गुप्ता, श्रीमती राजकुमारी (वार्ड 02), राकेश कुमार अग्रवाल (वार्ड 04), हेमंत कुमार (वार्ड 11), इन्द्रदीप कंवर (वार्ड 01), फणीश्वर कर्ष (वार्ड 05) और इन्द्रजीत विंझवार (वार्ड 27) सहित अन्य पार्षदों के हस्ताक्षर शामिल हैं।
इस घटना के बाद बांकीमोंगरा की राजनीति में गरमाहट आ गई है। पार्षदों के इस रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि परिषद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
