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बांकीमोंगरा वार्ड क्र. 1 से 10 तक हुआ सुशासन तिहार शिविर कार्यक्रम, कई विभाग रहे नदारद।

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अजीत कुमार संवाददाता बांकीमोंगरा: बांकीमोंगरा वार्ड क्र. 1 से 10 तक हुआ सुशासन तिहार शिविर कार्यक्रम, कई विभाग रहे नदारद।

छत्तीसगढ़/कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा अन्तर्गत वार्ड क्रमांक 1 से 10 तक आयोजित सुशासन तिहार शिविर में जनता की समस्याओं और मांगों से जुड़े कुल 146 आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन इनमें से केवल 23 आवेदनों का ही मौके पर त्वरित निराकरण हो सका। शेष आवेदनों को जांच और आगे की प्रक्रिया के नाम पर लंबित कर दिया गया।

शिविर में बड़ी संख्या में वार्डवासी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे, लेकिन कई महत्वपूर्ण विभागों की गैरमौजूदगी ने पूरे आयोजन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। जिसमें पुलिस विभाग, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग सहित अन्य कई विभागों की कुर्सियां पूरे समय खाली पड़ी रहीं। संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं होने के कारण लोगों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि शासन जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर जिम्मेदार विभागों की अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन की पोल खोल दी। कई लोग अपनी शिकायतें लेकर घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारी नहीं पहुंचने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।

आवेदन के साथ मांगा गया आधार कार्ड, लोग हुए परेशान

शिविर में आवेदन जमा करने पहुंचे लोगों ने आरोप लगाया कि पालिका में पदस्थ सहायक राजस्व निरीक्षक दीपक अग्रवाल द्वारा आवेदन के साथ आधार कार्ड अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा था। कई लोग जरूरी दस्तावेज साथ नहीं लाए थे, जिसके कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों का कहना है कि सामान्य शिकायत और जनसमस्याओं के आवेदन में भी आधार कार्ड की मांग समझ से परे है।

पहले से विभागों की गैरमौजूदगी से नाराज लोगों की परेशानी आधार कार्ड की अनिवार्यता ने और बढ़ा दी। वार्डवासियों का कहना है कि सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की समस्याएं सुनना और उनका समाधान करना है, लेकिन शिविर में लोगों को राहत के बजाय नियमों और अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है।

खाली कुर्सियों ने खोली व्यवस्थाओं की पोल

कार्यक्रम स्थल पर खाली पड़ी कुर्सियां पूरे आयोजन की अव्यवस्था की तस्वीर बयां करती नजर आईं। लोगों का कहना है कि जिन विभागों से सबसे ज्यादा जनसमस्याएं जुड़ी रहती हैं, वही विभाग कार्यक्रम से गायब रहे। ऐसे में सुशासन तिहार का उद्देश्य आखिर कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल बन गया है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है कि किन सेवाओं और आवेदनों के लिए आधार कार्ड आवश्यक है, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने देने की मांग भी उठाई गई है।

साथ ही कुछ पार्षद व जनप्रतिनिधि शिविर का लाभ लेने पहुंचे वार्ड जनता के अन्त तक साथ देते दिखे तो वहीं कुछ पार्षद गायब नजर आया। जिसमें लोगों की बीच में चर्चा रहा कि हम जिसे अपना पार्षद ( प्रतिदिन ) चुनें है वे गायब है तो दुसरे को क्या दोष दे। इस तरह का शिविर में जनता को शासन की योजनाओं का लाभ लेने का मौका मिलता है और उस लाभ को जनता को समझाने व लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय पार्षद व जनप्रतिनिधि का भी कर्तव्य है। परन्तु कुछ पार्षद व जनप्रतिनिधि नजर नहीं आये। और कुछ पार्षद व जनप्रतिनिधि शिविर स्थल में शुरू से अंत तक शिविर में शामिल जनता का साथ देते दिखे।

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